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आयुर्वेदिक उपाय। आपकी रसोई में मौजूद हैं माइग्रेन को ठीक करने वाली चीजें, इनका सेवन आज ही शुरू करें, और जल्द मिलेगी राहत।

 

हम सबको कभी-न-कभी सिरदर्द की शिकायत होती है, जो आम है। लेकिन अगर आपको दर्द सिर के एक हिस्से में हो रहा है और इसके साथ उल्टी, रुक-रुककर चमकीली रोशनी और टेढ़ी-मेढ़ी रेखाएं समेत आंखों के सामने काले धब्बे दिखाई दे रहे हैं तो सतर्क हो जाए क्योंकि ये सारे लक्षण माइग्रेन की समस्या के है। माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जिसमें रह-रहकर सिर में एक तरफ बहुत ही चुभन भरा दर्द होता है। माइग्रेन का दर्द घंटेभर रह सकता है या फिर ये एक-दो दिन तक आपको परेशान कर सकता है। माइग्रेन होने के सटीक कारणों का अभी तक पता नहीं चला है, लेकिन एक्सपर्ट की मानें तो ये हार्मोनल परिवर्तन, तनाव, नींद की कमी, चमकदार रोशनी या तेज गंध जैसे कारकों की वजह से शुरू हो सकता है।

माइग्रेन के उपचार में आम तौर पर जीवनशैली में बदलाव, ट्रिगर्स की पहचान करना और उनसे बचना शामिल है, जिसके लिए दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन अगर आप बिना दवाओं का सेवन किए माइग्रेन की समस्या से निजात पाना चाहते हैं तो आयुर्वेदिक उपचारो को ट्राई कर सकते हैं। आयुर्वेद डॉक्टर दीक्सा भावसार सावलिया ने अपने सोशल मीडिया पर उन चीजों के बारे में जानकारी साझा की है, जो माइग्रेन की समस्या दूर करने में आपकी मदद करेगी। अच्छी बात यह है कि इन चीजों के लिए आपको अपने घर की रसोई तक का सफर तय करना पड़ेगा।

आपकी रसोई से ही माइग्रेन ठीक करने वाले 3 खाद्य पदार्थ

हर्बल चाय- इसे दोपहर के भोजन या रात के खाने के एक घंटे बाद या जब भी माइग्रेन के लक्षण प्रमुख हों, लिया जा सकता है। इसकी बनाना भी बहुत आसान है। इसके लिए 1 गिलास पानी (300 मिली) लें, आधा चम्मच अजवाइन, 1 इलायची दरदरी कुटी हुई, 1 चम्मच जीरा, 1 बड़ा चम्मच धनिये के बीज और 5 पुदीने की पत्तियां लें। इन सब चीजों को मध्यम आंच पर 3 मिनट तक उबालें और अपनी स्वादिष्ट माइग्रेन शांत करने वाली चाय की चुस्की लें। यह मतली और तनाव से राहत के लिए सबसे अच्छा काम करता है। सोते समय, या जब भी लक्षण प्रमुख हों, लिया जा सकता है।

भीगी हुई किशमिश- सुबह सबसे पहले हर्बल चाय (पिछली रील में साझा किया गया रिवाइव) पीने के बाद, रात भर भिगोई हुई 10-15 किशमिश माइग्रेन के सिरदर्द से राहत दिलाने में अद्भुत काम करती है। लगातार 12 हफ्ते तक इसका सेवन करें। ये बढ़े हुए वात के साथ-साथ शरीर में अतिरिक्त पित्त को कम करेगी और माइग्रेन से जुड़े सभी लक्षणों जैसे एसिडिटी, मतली, जलन, एक तरफा सिरदर्द, गर्मी के प्रति असहिष्णुता आदि को शांत करने में मदद करेगी।

गाय का घी- शरीर और दिमाग में अतिरिक्त पित्त को संतुलित करने में गाय के घी से बेहतर कुछ भी काम नहीं करता है। घी का उपयोग विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है, भोजन में (रोटी पर, चावल में या घी में सब्ज़ियाँ भूनकर), सोते समय दूध के साथ ले सकते हैं, नस्य के रूप में (नाक में 2 बूँदें डालना), औषधियों के साथ- माइग्रेन के लिए कुछ जड़ी-बूटियां जैसे ब्राह्मी, शंखपुष्पी, यष्टिमधु आदि को घी के साथ लिया जा सकता है।

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