देहरादून। उत्तराखंड में शनिवार से जनगणना 2027 के पहले चरण ‘हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन’ के साथ एक बड़े ‘डोर-टू-डोर डेटा मिशन’ की शुरुआत हो गई है। इस अभियान के तहत अब प्रगणक राज्यभर में घर-घर पहुंचकर हर भवन, हर परिवार और उससे जुड़ी अहम जानकारी का रिकॉर्ड तैयार कर रहे हैं।
यह केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की विकास योजनाओं की नींव रखने का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इस प्रक्रिया से प्राप्त डेटा शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत सुविधाओं और सामाजिक योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
राज्य के पर्वतीय से लेकर मैदानी इलाकों तक जनगणना की टीमें सक्रिय हो चुकी हैं। अल्मोड़ा के हवालबाग क्षेत्र से लेकर लक्ष्मेश्वर वार्ड तक और रुद्रप्रयाग के सुदूर गांवों से लेकर खटीमा तहसील तक—हर जगह प्रगणक पूरी निष्ठा के साथ लोगों के दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद टीमों का उत्साह इस अभियान को खास बना रहा है।
इस चरण में हर मकान का सूचीकरण किया जाएगा और उसमें रहने वाले परिवारों से विस्तृत जानकारी जुटाई जाएगी। यही डेटा भविष्य की योजनाओं को दिशा देगा और राज्य के संतुलित विकास का आधार बनेगा।
नागरिकों की सुविधा के लिए 1855 टोल-फ्री हेल्पलाइन भी शुरू की गई है, जहां लोग जनगणना से जुड़ी जानकारी और अपनी शंकाओं का समाधान प्राप्त कर सकते हैं। यह सेवा सोमवार से शुक्रवार, सुबह 9:30 बजे से शाम 6 बजे तक उपलब्ध रहेगी।
प्रदेशवासियों से अपील की गई है कि वे इस राष्ट्रीय अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं, प्रगणकों को सही जानकारी दें और उत्तराखंड के विकास की इस प्रक्रिया में अपना योगदान सुनिश्चित करें।