मसूरी में MDDA ने बहुमंजिला इमारत के 50 फ्लैट किए सील, सीलिंग के बावजूद रहने लगे थे लोग

पहाड़ों की रानी मसूरी में अवैध निर्माण और कब्जों पर एक बार फिर बड़ी कार्रवाई हुई है. जिसके तहत नगर पालिका परिषद और मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की संयुक्त टीम ने मासौनिक लॉज डिमरी निवास के पास स्थित बहुमंजिला भवन के करीब 40 से 50 फ्लैटों को सील कर दिया. कार्रवाई के दौरान काफी संख्या में फ्लैट स्वामी मौके पर पहुंचे और नाराजगी जताई. इस कार्रवाई ने जितने सवाल अवैध निर्माण पर खड़े किए हैं, उससे कहीं ज्यादा सवाल प्रशासनिक निगरानी और विभागीय जवाबदेही पर उठने लगे हैं.

जानकारी के मुताबिक, यह भवन पूर्व में नगर पालिका के तत्कालीन पालिकाध्यक्ष अनुज गुप्ता और उसकी बोर्ड के कार्यकाल में बनाया गया था. आरोप है कि निर्माण के लिए न तो मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) से स्वीकृत मानचित्र लिया गया और न ही अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) ली गई. इसके बावजूद छह मंजिला इमारत में 40 से 50 फ्लैट तैयार कर दिए गए और बाद में उनमें लोगों का रहना भी शुरू हो गया.

MDDA seals 50 flats in Mussoorie

सबसे बड़ा सवाल ये है कि साल 2023 में तत्कालीन संयुक्त सचिव नंदन कुमार के नेतृत्व में जिला प्रशासन और एमडीडीए ने इसी भवन को सील कर था. उस समय भवन को पूरी तरह सील कर दिया गया था, लेकिन आरोप है कि बाद में सील तोड़ दी गई और लोग एक-एक कर फ्लैटों में रहने लगे. इतना ही नहीं निर्माणाधीन हिस्सों में भी फ्लैट तैयार कर उन पर कब्जे हो गए.

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि सील किए गए भवन में दोबारा कब्जे हो गए और लोग वहां रहने भी लगें, तो यह नगर पालिका और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल है. आखिर सील तोड़ी गई, तो जिम्मेदार अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की? यदि कार्रवाई हुई, तो उसका परिणाम क्या रहा? यह सवाल अब मसूरी में चर्चाओं का विषय बना हुआ है.

MDDA seals 50 flats in Mussoorie

वहीं, पूरे कार्रवाई के दौरान फ्लैट मालिकों और निवासियों में भारी नाराजगी देखने को मिली. उनका कहना था कि उन्होंने जीवनभर की जमा-पूंजी लगाकर फ्लैट खरीदे हैं. यदि निर्माण अवैध था तो भवन निर्माण के समय ही उसे क्यों नहीं रोका गया? अब सालों बाद उन्हें घर खाली करने के लिए मजबूर किया जा रहा है. जबकि, असली जिम्मेदारों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.

पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर मसूरी में अवैध निर्माण, विभागीय लापरवाही और प्रशासनिक जवाबदेही को कठघरे में खड़ा कर दिया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल फ्लैट सील कर देने से समस्या का समाधान नहीं होगा. जरूरत इस बात की है कि यह भी तय किया जाए कि बिना मानचित्र स्वीकृति, बिना फायर एनओसी और न्यायालय के आदेशों के बावजूद भवन कैसे तैयार हुआ? साल 2023 में लगी सील कैसे टूटी और इतने लंबे समय तक प्रशासन ने प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की?

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