मुजफ्फरनगर | सत्य वॉइस न्यूज
उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्यायों में शामिल रामपुर तिराहा कांड से जुड़े फर्जी हथियार बरामदगी मामले में 32 साल बाद न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। विशेष सीबीआई अदालत ने तत्कालीन एसएचओ बृजकिशोर, कांस्टेबल उमेश चंद और अनिल कुमार को दोषी करार देते हुए डेढ़-डेढ़ वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही तीनों दोषियों पर 21-21 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
शाम चार बजे सुनाया गया फैसला
विशेष सीबीआई अदालत के पीठासीन अधिकारी डी.के. फौजदार ने दोनों पक्षों की दलीलें और साक्ष्यों पर सुनवाई पूरी करने के बाद मंगलवार शाम करीब चार बजे फैसला सुनाया। मामले से जुड़े अधिवक्ता अनुराग वर्मा ने इसे न्याय की दिशा में ऐतिहासिक फैसला बताया।
आंदोलनकारियों को फंसाने के लिए रची गई थी फर्जी कहानी
यह मामला वर्ष 1994 के रामपुर तिराहा गोलीकांड के बाद दर्ज किए गए उस मुकदमे से जुड़ा है, जिसमें आंदोलनकारियों के पास से अवैध हथियार बरामद होने का दावा किया गया था। बाद में सीबीआई जांच में यह बरामदगी पूरी तरह फर्जी साबित हुई और पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
उत्तराखंड आंदोलन के लिए न्याय का महत्वपूर्ण पल
रामपुर तिराहा कांड उत्तराखंड राज्य आंदोलन की सबसे संवेदनशील घटनाओं में गिना जाता है। तीन दशक से अधिक समय तक चली कानूनी लड़ाई के बाद आए इस फैसले को आंदोलनकारियों, उनके परिजनों और उत्तराखंडवासियों ने न्याय की बड़ी जीत बताया है। यह फैसला इस बात का भी संदेश देता है कि न्याय में भले देर हो, लेकिन कानून के सामने दोषियों को जवाब देना ही पड़ता है।