धर्म

उत्तराखंड के न्यायकारी देव गोलज्यू की कहानी PART-2: आखिर कौन हैं गोलज्यू, कहां पैदा हुए? कौन हैं माता-पिता,भाई…

गोलज्यू को उत्तराखंड में सर्वोच्च देवता माना जाता है। इनकी न्यायकारी शक्तियों के आगे बड़े-बड़े राजामहाराजों से लेकर अंग्रेज शासकों तक ने शीश झुकाया है। मान्यता है की अपनी माता कलिंगा के आदेश पर गोलज्यू आज भी अपने भक्तों के साथ साए की तरह चलते हैं। और उनके हर दुःख दर्द को दूर करने में मदद करते हैं।

गोल्ज्यू देवता -12

इस नाम से पूजे जाते हैं गोलज्यू

हाड़ में इलाके और बदली बोली के अनुसार ग्वेल, गोरल, गोलू, गोरिया, गुल्ल, ग्वाल्ल, दूदाधारी, गौर भैरव के नाम से पुकारते हैं।  पौड़ी गढ़वाल में लोग उन्हें कंडोलिया के नाम से पूजते हैं। वहां पर कंडोलिया महाराज की बहुत मान्यता है।

गोलू देवता

 

किसके पुत्र और भाई हैं गोलज्यू!

धूमाकोट राजघराने के राजा थे तलराय, उनके पुत्र हुए प्रतापी राज झालराय और उनके पुत्र पुए हालराय। राजा हालराय के यश और कीर्ति की चर्चा हर तरफ थी। शिव अवतारी गोलज्यू ने धूमाकोट के इसी राजघराने में जन्म लिया। गोलज्यू राजा हालराय और उनकी आठवीं रानी कलिंगा की पहली संतान थे। कलिंगा से पहले सात रानियां होते हुए राजा हालराय की कोई संतान नहीं थी।

क्योंकि राजा हालराय बेहद न्यायकारी और प्रभु भक्ति वाले थे। लेकिन संतान प्राप्ति न होने से राजा दुखी थे। एक दिन एक संत ने उनके घर शिव अवतारी पुत्र पैदा होने की भविष्यवाणी की। आठवां विवाह करने की सलाह दी। बाद में चलकर राजा हालराय ने पंचनाम देवताओं, हरु और सैम की बहन कलिंगा से शादी की।

Golu Devta Ji

और माता कलिंगा के गर्भ से पहले पैदा हुए गोलज्यू जिन्हें गौर भैरव कहा गया। गोलज्यू का स्वरूप एकदम गोरा-चिट्टा था। और उन्हें हर चीज सफेद ही पसंद थी। जबकि गोलज्यू के छोटे भाई थे कालेसन या कालसन बेहद काले थे। जिन्हें गोलज्यू ने काल भैरव कहा। कालसन गोलज्यू के प्रधानमंत्री और सेनापति थे। दोनों पराक्रमी और वीर प्रतापी भाईयों ने धूमाकोट से निकलकर अपने राज्य का विस्तार किया।

और अपना अलग साम्राज्य स्थापित किया। गोलज्यू जहां कुमाऊं के चंपावती राजा के रूप में विख्यात हुए वहीं कालेसन उनके ऐसे सेनापति के रूप में पूजे जाते हैं जो अन्याय बर्दाश्त नहीं करते। मान्यता है कि दोनों भाई आज भी अपने भक्तों के साथ चलते हैं। और उनका बुरा नहीं होने देते।

गोलज्यू!

 

गोलज्यू की कहानी के अगले हिस्से में पढ़िए…उनके जन्म से लेकर न्यायकारी देव बनने तक की पूरी कहानी…जिसमें कई उतार-चढ़ाव देखने को मिलेंगे…इस हिस्से को आप  PART-3 में पढ़ेंगे

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