- राज्य गीत को ठंडे बस्ते में डालना उत्तराखंड की आत्मा का अपमान: कांग्रेस
- “राज्य-गीत की उपेक्षा से आहत हूँ” – गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी
देहरादून | 6 फरवरी 2026 उत्तराखंड के आधिकारिक राज्य गीत की अनदेखी को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शुक्रवार को देहरादून के बल्लीवाला चौक स्थित वैडिंग प्वाइंट में कांग्रेस की ओर से “उत्तराखंड राज्य गीत की वर्षगांठ” के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें राज्य गीत को हाशिये पर डालने को उत्तराखंड की आत्मा और सांस्कृतिक अस्मिता का अपमान बताया गया।
कार्यक्रम का संयोजन कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव थापर ने किया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि “उत्तराखंड देवभूमि–मातृभूमि” राज्य गीत, जिसे 6 फरवरी 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्य की जनता को समर्पित किया था, बीते करीब दस वर्षों से सरकारी कार्यक्रमों से गायब है।
कांग्रेस का आरोप: जानबूझकर भुलाया गया राज्य गीत
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि वर्तमान भाजपा सरकार ने राजनीतिक संकीर्णता के चलते राज्य गीत को जानबूझकर नजरअंदाज किया है।
यह गीत प्रख्यात गीतकार हेमंत बिष्ट द्वारा लिखित, गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी के संगीत और स्वर तथा अनुराधा निराला की आवाज़ से सुसज्जित है। राज्य गीत चयन समिति के अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार लक्ष्मण सिंह बटरोही थे, जिसमें नरेंद्र सिंह नेगी भी सदस्य रहे।
कांग्रेस का कहना है कि यह गीत उत्तराखंड की लोक संस्कृति, परंपरा, प्रकृति और आस्था का जीवंत दस्तावेज़ है, जिसे दबाना राज्य की पहचान को कमजोर करने जैसा है।
भावुक हुए गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी ने राज्य गीत की कुछ पंक्तियाँ गाते हुए कहा कि उन्होंने यह गीत राज्य के लिए सेवा भाव से रचा था और इसके लिए सरकार से कोई पारिश्रमिक नहीं लिया।
उन्होंने कहा,
“यह गीत मैंने अपनी मातृभूमि के लिए बनाया। लेकिन जिस तरह इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है, वह अत्यंत दुखद है। राज्य-गीत की उपेक्षा से मैं व्यक्तिगत रूप से आहत हूँ।”
हरीश रावत का हमला: यह पूरे राज्य की धरोहर
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि राज्य गठन के 15 साल बाद उत्तराखंड को उसकी पहचान देने वाला राज्य गीत मिला था।
उन्होंने कहा,
“यह किसी एक सरकार का नहीं, पूरे उत्तराखंड की धरोहर है। भाजपा सरकार ने श्रेय की राजनीति में इसे भुला दिया, जो राज्य की भावना के साथ अन्याय है।”
गणेश गोदियाल: संस्कृति को दबाने की कोशिश
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि राज्य गीत को दबाना उत्तराखंड की सांस्कृतिक चेतना को दबाने जैसा है।
उन्होंने सवाल उठाए—
- क्या उत्तराखंड की पहचान सिर्फ चुनावी नारों तक सीमित है?
- क्या राज्य की भाषा, संस्कृति और भावनाओं का कोई मूल्य नहीं?
- आखिर किस डर या द्वेष के कारण राज्य गीत को सरकारी कार्यक्रमों से गायब किया गया?
कांग्रेस का ऐलान: राज्य गीत पूरे उत्तराखंड का
कार्यक्रम के संयोजक अभिनव थापर ने कहा कि राज्य गीत किसी दल का नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की साझा विरासत है। इसकी अनदेखी देवभूमि की आत्मा के साथ अपराध है, जिसे कांग्रेस बर्दाश्त नहीं करेगी।
कार्यक्रम में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन अभिनव थापर ने किया।