देहरादून।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार द्वारा संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान प्रदेश में जनसरोकारों को सीधे ज़मीनी स्तर तक पहुँचाने का एक सशक्त और प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है।
यह अभियान शासन और आम नागरिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित करते हुए सेवा, सहभागिता और विश्वास के नए मानक गढ़ रहा है।
अभियान के तहत राज्यभर में लगातार जनहितकारी शिविरों (कैम्पों) का आयोजन किया जा रहा है, जहाँ आम नागरिकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ उनके निवास स्थान के समीप ही उपलब्ध कराया जा रहा है।
इससे न केवल समय और संसाधनों की बचत हो रही है, बल्कि जनता को त्वरित समाधान भी मिल रहा है।
एक दिन में 16 कैम्प, 6,820 नागरिकों को मिला लाभ
आज आयोजित अभियानों की बात करें तो प्रदेश में कुल 16 कैम्पों का आयोजन किया गया, जिनमें 6,820 नागरिकों ने प्रत्यक्ष रूप से सरकारी सेवाओं का लाभ उठाया। यह आँकड़ा स्पष्ट करता है कि राज्य सरकार की योजनाएँ अब कागज़ों से निकलकर ज़मीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू हो रही हैं।
अब तक 541 कैम्प, 4.28 लाख से अधिक नागरिक लाभान्वित
अद्यावधि तक उत्तराखण्ड में कुल 541 कैम्पों का सफल आयोजन किया जा चुका है, जिनके माध्यम से 4,28,183 नागरिकों तक सरकारी सेवाएँ, समाधान और योजनाओं का लाभ पहुँचाया गया है।
यह उपलब्धि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उस विज़न को साकार करती है, जिसमें सरकार स्वयं जनता के द्वार तक पहुँचकर उनकी समस्याओं का समाधान करती है।
मुख्यमंत्री धामी का बयान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा,
“हमारी सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएँ बनाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हर पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचे। ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान इसी सोच का सजीव उदाहरण है।”
सुशासन की दिशा में मजबूत कदम
इस अभियान के माध्यम से न केवल जनसमस्याओं का त्वरित समाधान हो रहा है, बल्कि शासन व्यवस्था में जनता की सहभागिता भी लगातार बढ़ रही है। पारदर्शिता, जवाबदेही और संवेदनशील प्रशासन की दिशा में यह पहल उत्तराखण्ड में सुशासन का मजबूत आधार बन रही है।
आज “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश में विश्वास, विकास और जनकल्याण का प्रतीक बन चुका है।