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राजनीति

वाईएसआरटीपी नेता शर्मिला को नाटकीय गिरफ्तारी के कुछ घंटे बाद जमानत मिली

हैदराबाद, 30 नवंबर (आईएएनएस)। शहर की एक अदालत ने मंगलवार को वाईएसआर तेलंगाना पार्टी (वाईएसआरटीपी) की नेता वाई.एस. शर्मिला को गिरफ्तार किए जाने के कुछ घंटों बाद जमानत दे दी। शर्मिला को पिछले दिन मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के आधिकारिक आवास जाते समय गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले वारंगल जिले में टीआरएस के लोगों ने उनके वाहन में तोड़फाड़ की थी।

पुलिस ने मंगलवार रात शर्मिला और छह अन्य को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया, जिन्होंने उन्हें निजी मुचलके पर जमानत दे दी, जबकि पुलिस ने शर्मिला की रिमांड मांगी थी।

शर्मिला के वकील ने तर्क दिया कि पुलिस ने उनके मुवक्किल के खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए, हालांकि वह अपने समर्थकों के साथ शांतिपूर्ण विरोध करना चाहती थीं। मजिस्ट्रेट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद वाईएसआरटीपी नेता व अन्य को जमानत दे दी।

शर्मिला अपने समर्थकों के साथ मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव से अपनी प्रजा प्रस्थानम पदयात्रा के दौरान उनके काफिले पर हुए हमले की शिकायत करने जा रही थीं।

राजभवन रोड पर उस समय नाटकीय दृश्य देखा गया, जब वाईएसआरटीपी द्वारा क्षतिग्रस्त बस और कार के साथ निकाली गई रैली को पुलिस ने रोक दिया। क्षतिग्रस्त कार चला रहीं शर्मिला ने वाहन से नीचे उतरने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस कार को उठा ले गई और शर्मिला अंदर बैठी ही रहीं।

शर्मिला आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी की बहन हैं। गिरफ्तारी के बाद उन्हें एसआर नगर पुलिस स्टेशन ले जाया गया। वहां भ्ी उन्होंने कार से बाहर आने से इनकार कर दिया। तब पुलिसकर्मियों ने जबरन कार का दरवाजा खोला और उन्हें थाने में ले गए। पुलिस ने वाईएसआरटीपी के लोगों के एक समूह को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया, ये लोग शर्मिला की गिरफ्तारी का विरोध करने के लिए वहां एकत्र हुए थे।

शर्मिला की मां विजयम्मा को उस वक्त नजरबंद कर दिया गया, जब वह अपनी बेटी से मिलने थाने जा रही थीं। इसके बाद विजयम्मा अपने लोटस पॉन्ड स्थित आवास पर धरने पर बैठ गईं।

शर्मिला के पति अनिल कुमार थाने पहुंचे और पुलिस के हंगामेदार व्यवहार की निंदा की। उन्होंने कहा कि लोगों के मुद्दों को उठाने वाली एक महिला नेता को गैर जमानती धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है।

शर्मिला और छह अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 143 (गैरकानूनी जमावड़ा), 341 (गलत तरीके से रोकना), 290 (सार्वजनिक उपद्रव), 506 (आपराधिक धमकी), 509 (महिला की गरिमा का अपमान करना), 336 (जीवन या व्यक्तिगत को खतरे में डालना) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

महिला सब-इंस्पेक्टर के. अखिला की शिकायत पर पंजागुट्टा पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

अन्य आरोपी इंदुजा रेड्डी, सुधा रानी, एमडी मुशरफ, बाशा, संजीव कुमार, कोडेम श्रीनू और अन्य थे।

–आईएएनएस

एसजीके/एएनएम

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