- FIR रद्द कराने की अर्जी में अतिरिक्त प्रार्थनाओं को कोर्ट ने बताया ‘दबाव की रणनीति’, जांच प्रभावित करने की आशंका जताई
देहरादून/कोटद्वार। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कोटद्वार के जिम संचालक मोहम्मद दीपक उर्फ दीपक कुमार की याचिका पर सुनवाई के दौरान कड़ी मौखिक टिप्पणियां की हैं।
कोर्ट ने साफ कहा कि एक “संदिग्ध आरोपी” पुलिस सुरक्षा की मांग कैसे कर सकता है और याचिका में शामिल कुछ प्रार्थनाओं को “जांच एजेंसी पर दबाव बनाने की कोशिश” बताया।
जस्टिस राकेश थपलियाल की एकलपीठ के समक्ष दायर याचिका में मुख्य मांग याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की थी। हालांकि, इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने पुलिस प्रोटेक्शन, कथित हेट स्पीच के आरोपियों पर नई FIR दर्ज कराने और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की भी मांग की थी, जिस पर कोर्ट ने आपत्ति जताई।
कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा मांगी गई अतिरिक्त राहतें “गैर-ज़रूरी” हैं और इनका उद्देश्य चल रही जांच को प्रभावित करना तथा मामले को “सनसनीखेज” बनाना प्रतीत होता है।
कोर्ट ने पुलिस सुरक्षा की मांग पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब याचिकाकर्ता स्वयं एक “सस्पेक्टेड आरोपी” है और जांच के दायरे में है, तो वह इस स्तर पर सुरक्षा की मांग कैसे कर सकता है। राज्य के वकील ने भी कोर्ट को बताया कि जांच अधिकारी के अनुसार याचिकाकर्ता को फिलहाल कोई खतरा नहीं है।
वैकल्पिक कानूनी उपाय का जिक्र
हेट स्पीच के आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग पर अदालत ने कहा कि इसके लिए याचिकाकर्ता के पास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष जाने का विकल्प मौजूद है। सीधे हाईकोर्ट का रुख करना उचित नहीं है, खासकर तब जब याचिकाकर्ता खुद एक FIR में आरोपी हो।
पुलिस पर आरोप और कोर्ट की प्रतिक्रिया
पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कथित “पक्षपातपूर्ण रवैये” को लेकर विभागीय जांच की मांग पर कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसे आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस सामग्री नहीं है। अदालत ने इसे लंबित जांच को प्रभावित करने की कोशिश बताया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 26 जनवरी की एक घटना से जुड़ा है, जिसमें कथित तौर पर याचिकाकर्ता और बजरंग दल के सदस्यों के बीच विवाद हुआ था।
आरोप है कि एक मुस्लिम दुकानदार द्वारा दुकान के नाम में ‘बाबा’ शब्द के उपयोग को लेकर विवाद हुआ, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
दीपक कुमार पर दंगा, चोट पहुंचाने और शांति भंग करने से जुड़े आरोपों में FIR दर्ज है।
कोर्ट में अन्य तथ्य भी सामने आए
सुनवाई के दौरान राज्य पक्ष ने बताया कि याचिकाकर्ता की शिकायतों के आधार पर पहले ही दो FIR (संख्या 25/2026 और 28/2026) दर्ज की जा चुकी हैं। वहीं, याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया कि उनके मुवक्किल को इन FIR की जानकारी नहीं थी।
कोर्ट ने तथ्यों के सत्यापन के लिए याचिकाकर्ता को समय दिया है।
इसके अलावा, अदालत ने यह भी पूछा कि घटना के बाद याचिकाकर्ता को समर्थकों से कितनी आर्थिक सहायता मिली। वकील ने बताया कि लगभग 80 हजार रुपये प्राप्त हुए थे, जिसके बाद बैंक के निर्देश पर खाता गतिविधि रोक दी गई।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि जांच के दौरान अनावश्यक राहतों की मांग स्वीकार नहीं की जाएगी। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को अपने “स्टेटस” को समझते हुए याचिका दायर करनी चाहिए और न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।
मामले की अगली सुनवाई में कोर्ट याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत तथ्यों और दस्तावेजों की समीक्षा करेगा।