हनोई की स्ट्रीट लाइब्रेरी

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हनोई की स्ट्रीट लाइब्रेरी

यह वियतनाम की राजधानी हनोई की स्ट्रीट लाइब्रेरी है। अपने देश में मैंने कहीं ऐसी लाइब्रेरी नहीं देखी जो किसी आम सड़क के दोनों और फैली हो और सड़क के ठीक बीच में पढ़ने वालों के लिए बैठने की जगह बनाई गई हो। जिस इलाके में यह स्ट्रीट लाइब्रेरी है, वह सड़क पूरी तरह से खुली हुई है और सड़क के ऊपर के हिस्से को कवर किया गया है ताकि खराब मौसम या बारिश के दिनों में पाठक आराम से बैठ कर पढ़ सकें। इसमें जो दुकाने या काउंटर दिख रहे हैं वहां से आप अपनी पसंद की किताब ले सकते हैं और बैठ कर पढ़ सकते हैं और फिर उसे लौटा कर घर वापस जा सकते हैं। खरीदनी चाहें तो खरीद भी सकते हैं।

इस स्ट्रीट लाइब्रेरी में किताबों की 20 से ज्यादा बड़ी दुकानें और काउंटर बने हुए हैं। साथ में खाने-पीने के कुछ ठिकाने भी बनाए गए हैं और अगर किताब पढ़ने का मन ना हो तो आप इस स्ट्रीट लाइब्रेरी में आराम से चहल कदमी भी कर सकते हैं। दुकानों और काउंटर्स में किताबों को बहुत करीने से रखा गया है, उससे भी ज्यादा करीने से पाठकों की बैठने की व्यवस्था की गई है यह प्रयोग अद्भुत है। हमारे यहां पब्लिक लाइब्रेरी के नाम पर जो लाइब्रेरी दिखती हैं, वे एक बंद ठिकाने की तरह होती हैं, जिनके बारे में उनके सामने से गुजर रहे लोगों को भी कुछ पता नहीं होता। स्ट्रीट लाइब्रेरी का प्रयोग न तो बहुत महंगा है और ना ही बहुत सजावटी है। इस प्रयोग को हमारे छोटे शहरों तक में आसानी से दोहराया जा सकता है ।

हो ची मिन्ह की लीडरशिप में कम्युनिस्ट वियतनाम ने शायद बहुत पहले इस बात को समझ लिया था कि यदि लोगों को किताबों और लाइब्रेरी से जोड़ कर रखना है तो उन्हें केवल विश्वविद्यालयों या कालेज तक सीमित नहीं रखना बल्कि सड़क तक का हिस्सा बनाना है। हमारी सरकारें चाहें तो जिला पुस्तकालय, नगर निगम, नगर पालिकाओं और अन्य सार्वजनिक पुस्तकालयों को इसी तरह से स्ट्रीट लाइब्रेरी में तब्दील कर दें और इन्हें उसी तरह से आम लोगों की जिंदगी का हिस्सा बना दें, जैसे कोई सड़क हमारी जिंदगी का अनिवार्य हिस्सा होती है। जिसके दिमाग में भी यह कंसेप्ट आया होगा उस व्यक्ति को सलाम करने का मन करता है। जब कभी हनोई जाएं तो इस स्ट्रीट लाइब्रेरी को जरूर देखें।

वरिष्ठ पत्रकार और स्नातकोत्तर महाविद्यालय में प्राचार्य डॉक्टर सुशील उपाध्याय की एफबी वॉल से