इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लखनऊ हिंसा के आरोपितों के पोस्टर हटाने का दिया आदेश

Share this story

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लखनऊ हिंसा के आरोपितों के पोस्टर हटाने का दिया आदेश
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरोध प्रदर्शन के दौरान संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के सड़क किनारे लगाये गए पोस्टर तत्काल हटाने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 16 मार्च को अनुपालन रिपोर्ट के साथ हलफनामा दाखिल करने का प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर तथा न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की खंडपीठ ने महाधिवक्ता को सुनने के बाद यह आदेश सोमवार को दिया। डबल बेंच ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेकर रविवार 8 फरवरी को होली अवकाश में इस प्रकरण की सुनवाई करके फैसला सुरक्षित रखा था। प्रदेश के महाधिवक्ता ने आज सोमवार को सरकार का समर्थन करते हुए पक्ष रखा।
लखनऊ में सीएए के विरोध प्रदर्शन में संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की फोटो प्रशासन द्वारा सार्वजनिक स्थल पर लगाने को निजता के अधिकार के हनन मामले में आदेश 9 मार्च को 2 बजे सुनाने का हाईकोर्ट ने आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा कि बिना कानूनी उपबंध के हिंसा में हुए नुकसान की वसूली के लिए लखनऊ में कथित आरोपितों का सड़कों पर पोस्टर व फोटो लगाना अवैध है। महाधिवक्ता राघवेन्द्र सिंह ने यह कहते हुए जनहित याचिका पर आपत्ति की थी कि लोक व निजी संपत्ति को प्रदर्शन के दौरान नुकसान पहुंचाने वालों को हतोत्साहित करने के लिए यह कार्रवाई की गयी है। ऐसे मामलों मे जनहित याचिका के जरिए हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। सरकार की कार्रवाई हिंसा व तोड़फोड़ की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए की गयी है। उन्होंने अपने पक्ष में नजीरे भी पेश की थी। सरकार की तरफ से महाधिवक्ता के अलावा अपर महाधिवक्ता नीरज त्रिपाठी ने भी सरकार का पक्ष रखा।