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उत्तराखंड में नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने पहुंचे मुस्लिम गाने लगे राष्ट्रगान

हल्द्वानी।। नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) के विरोध की आंच उत्तराखंड पहुंच चुकी है। पिछले दो दिनों में उत्तराखंड में कई जगह प्रदर्शन (Protest) देखने को मिले। लेकिन ज्यादातर प्रदर्शन में मुस्लिम समुदाय (Muslim) के लोग ही शामिल हुए। जिन्होंने इस कानून को धार्मिक भेदभाव वाला काला कानून करार दिया है। कुमाऊं के सबसे बड़े शहर हल्द्वानी (Haldwani) में भी इस कानून के विरोध में 21 दिसंबर को प्रदर्शन हुआ। जिसमें हजारों की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने शिरकत की। लेकिन ये प्रदर्शन पूरे देश के मुकाबले बेहद शांतिपूर्ण रहा। हजारों की संख्या में लोग ताज चौराहे पर जमा हुए। विभिन्न मस्जिदों के इमाम और मौलाना पहुंचे। उन्होंने अपनी बातें प्रशासन और जनता के सामने रखी। डीएम को कानून बदलने की मांग से जुड़ा ज्ञापन सौंपा। और घरों को चल दिए। लेकिन सबके बीच प्रदर्शन खत्म करने के दौरान अनूठी बात देखने को मिली। जब शहर इमाम ने प्रदर्शन में शामिल सभी प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रगान गाने का फरमान सुना डाला। फिर क्या था इमाम खुद राष्ट्रगान गाने लगे। और प्रदर्शकारी भी इमाम के सुर में सुर मिलाने लगे।

क्या है नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act)

नागरिकता संशोधन ये एक्ट संसद में पास होने के पहले CAB यानी (Citizenship Amendment Bill) था। लेकिन बिल संसद में पास होने और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद नागरिकता संसोधन कानून  (Citizenship Amendment Act) बन गया है। सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट की मदद से पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के कारण वहां से भागकर आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के लोगों को भारत की नागरिकता दी जाएगी।

इसलिए मुस्लिम कर रहे हैं विरोध 

इस एक्ट की मदद से पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश से आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के लोगों को भारत की नागरिकता के रास्ते साफ करता है। लेकिन इस एक्ट में इस्लाम को मानने वाले लोगों को शामिल नहीं किया गया है। इस कानून के लागू होने के बाद इस्लाम को छोड़ अन्य धर्मों के वो लोग जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 तक भारत में प्रवेश कर लिया था वे सभी भारत की नागरिकता के लिए आवेदन कर सकेंगे। इस कानून के विरोधियों का कहना है कि इसमें सिर्फ गैर मुस्लिम लोगों को नागरिकता देने की बात है। इसलिए ये धार्मिक भेदभाव वाला कानून है। जो भारत के संविधान (अनुच्छेद 14) का उल्लंघन है। साथ ही मुस्लिम समाज के लोगों को लग रहा है कि सरकार सीएए के बाद जनसंख्या और एनआरसी से जुड़ा कानून लागू कर सकती है। इसलिए अभी इस कानून का विरोध नहीं किया गया तो आने वाले समय में सरकार पर दबाव नहीं बनाया जा सकता।

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