लोनी (गाजियाबाद): गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र में प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं। सेवाधाम चौकी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कई रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से संचालित लोहा और पीतल गलाने वाली भट्टियां एक बार फिर धधकने लगी हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन इकाइयों को होली से पहले प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सील किया गया था, उनके संचालकों ने सील तोड़कर दोबारा संचालन शुरू कर दिया है।
⚠️ आबादी के बीच जहरीला धुआं, लोगों का जीना मुश्किल
स्थानीय निवासियों के मुताबिक कृष्णा विहार फेस-1, फेस-2, टिल्ला शाहबाजपुर और बेहटा हाजीपुर जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में बिना किसी मानक के धातु गलाने का काम किया जा रहा है। इन भट्टियों से निकलने वाला काला और जहरीला धुआं आसपास रहने वाले बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।
लोगों का कहना है कि इन इकाइयों के पास प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कोई वैध अनुमति (NOC) नहीं है, इसके बावजूद वे बेखौफ तरीके से संचालित हो रही हैं।
📄 प्रशासन को सौंपा गया प्रार्थना पत्र
कृष्णा विहार और बेहटा हाजीपुर के जागरूक नागरिकों ने एसडीएम (जॉइंट मजिस्ट्रेट) को प्रार्थना पत्र सौंपकर अवैध भट्टियों को स्थायी रूप से बंद कराने और ध्वस्त करने की मांग की है।
❗ सीलिंग के बाद भी कार्रवाई नहीं, उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि प्रदूषण विभाग द्वारा पहले इन इकाइयों को चिन्हित कर सील किया गया था, लेकिन इसके बावजूद संचालकों ने न केवल सील तोड़ दी बल्कि दोबारा काम शुरू कर दिया।
नागरिकों का यह भी कहना है कि विभागीय स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है और कुछ कर्मचारियों की संदिग्ध भूमिका भी सामने आ रही है, जो समय-समय पर क्षेत्र में आकर संचालकों से संपर्क में रहते हैं।
🏛️ प्रशासन की साख पर सवाल
इस पूरे मामले ने प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि शिकायत के बाद प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है और अवैध रूप से चल रही इन भट्टियों पर कब तक पूरी तरह रोक लग पाती है।