उत्तराखण्ड

क्या आप जानते हैं, कपाट बंद होने के बाद बदरीनाथ में क्या होता है?

चार धामों में सबसे प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के कपाट पूरे विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद हो गए हैं। आज शाम 5:13 पर हजारों लोगों की मौजूदगी में कपाट बंद किए गए। इस यात्रा सीजन में बारह लाख से ज्यादा यात्रियों ने बदरीनाथ के दर्शन किए। अब अगले वर्ष मार्च-अप्रैल में धाम के कपाट फिर खुलेंगे।

लेकिन क्या आप जानते हैं, कपाट बंद होने के बाद बदरीनाथ में क्या होता है?  इस अवधि में बदरीनाथ की पूजा कौन करता है ? बदरीनाथ में कौन-कौन निवास करता है ? आइए हम आपको इन सवालों के बारे बताते हैं।

रावल के बदले नारद जी और देवता करते हैं पूजा:

बदरीनाथ धाम की पूजा करने वाले मुख्य पुजारी को रावल कहते हैं। शंकराचार्य द्वारा स्थापित परंपरा के मुताबिक़ रावल दक्षिण भारत के ब्राह्मण परिवार से होता है। यात्रा सीज़न में रावल ही बदरीनाथ की पूजा करते हैं। उनके अलावा कोई अन्य व्यक्ति बदरीनाथ की मूर्ति को छू भी नहीं सकता है। लेकिन कपाट बंद होने के बाद रावल को भी बदरीनाथ धाम में रुकने की इजाजत नहीं होती। अन्य भक्तों की भाँति वे भी वापस लौट आते हैं। मान्यता है कि इसके बाद देवर्षि नारद और अन्य देवता बदरीनाथ की पूजा-अर्चना का जिम्मा संभालते हैं।

उद्धव और कुबेर नहीं, छह माह तक लक्ष्मी जी रहती हैं साथ :

कपाट बंद होने के दिन बदरीनाथ मंदिर को हज़ारों फूलों से सजाया जाता है। मुख्य पुजारी रावल पूरे गर्भग्रह को भी फूलों से सजाते हैं। पूजा अर्चना के बाद गर्भग्रह में मौजूद उद्धव और कुबेर की मूर्तियों को बाहर लाया जाता है। इसके बाद रावल स्त्री वेश में लक्ष्मी की सखी बनकर लक्ष्मी की मूर्ति को बदरीनाथ के सानिध्य में रख देते हैं। मान्यता है कि छह महीने तक लक्ष्मी यहीं रहती है।

घी में डुबोए कंबल में लिपटी रहती है मूर्ति : 

कपाट बंद होने के दिन बदरीनाथ की मूर्ति को घी में डुबोए गए ऊनी कंबल से लपेटा जाता है। ये ऊनी कंबल भारत के आखिरी गांव माणा की महिलाओं द्वारा बुनकर तैयार किया जाता है। इसे घृत कम्बल कहते हैं। बद्रीनाथ के रावल इस पर घी लगाते हैं और फिर इसे मूर्ति को ओढा देते हैं। इसके बाद हज़ारों श्रद्धालुओं द्वारा की जाने वाली जय-जय कार के बीच बदरीनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button