देहरादून में भगवान घंटाकर्ण की महिमा और उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को समर्पित भव्य त्रिदिवसीय घंटाकर्ण कथा का आयोजन 9 से 11 जनवरी 2025 तक किया जाएगा।
यह निर्णय आज हुई घंटाकर्ण कथा समिति की महत्वपूर्ण बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष सुशांत गैरोला ने की।
समिति ने इस वर्ष कथा के लिए टिहरी नगर के सामुदायिक भवन परिसर स्थित पार्क को आयोजन स्थल के रूप में चुना है, ताकि अधिक से अधिक भक्त सुविधा के साथ कार्यक्रम में शामिल हो सकें और क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण का विस्तार हो सके।
पूरे उत्तराखंड के घंटाकर्ण मंदिरों को मिलेगा आमंत्रण
बैठक में निर्णय लिया गया कि उत्तराखंड के सभी घंटाकर्ण मंदिरों के पुजारियों, व्यवस्थापकों और प्रतिनिधियों को इस आयोजन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। इसके लिए दिसंबर के पहले या दूसरे सप्ताह में एक संयुक्त बैठक की तैयारी भी प्रस्तावित की गई है।
- समिति ने बताया कि इस वर्ष कथा का वाचन प्रसिद्ध कथावाचक दिनेश सिमल्टी (मलेशिया वाले) करेंगे।
भक्तों के लिए कैलेंडर और स्वागत पट्टिका तैयार
समिति ने घोषणा की कि इस आयोजन की स्मृति में एक विशेष घंटाकर्ण कैलेंडर प्रकाशित किया जाएगा, जिसे सभी श्रद्धालुओं को भेंट रूप में दिया जाएगा। साथ ही स्वागत के लिए विशेष पट्टिकाएँ तैयार की जाएंगी, जिससे कार्यक्रम की सांस्कृतिक छवि और भव्यता और बढ़ सके।
युवाओं की भागीदारी और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे शामिल
बैठक में कथा के अलावा भविष्य की योजनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। समिति ने युवाओं की सहभागिता बढ़ाने और उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को संजोने के लिए नियमित रूप से धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया।
- इसके लिए एक स्थायी स्वागत मंच गठित किया जाएगा, ताकि भविष्य के सभी आयोजन व्यवस्थित रूप से संपन्न हो सकें।
इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर जनसंपर्क अभियान चलाने की योजना पर भी सहमति बनी, जिससे अधिक से अधिक लोग आयोजन से जुड़ सकें।
आयोजन समिति ने की अपील
समिति ने सभी भक्तों और श्रद्धालुओं से अपील की कि वे बड़ी संख्या में इस ऐतिहासिक आयोजन में शामिल हों और भगवान घंटाकर्ण की परंपरा को नई पहचान देने में योगदान दें।
बैठक में शामिल प्रमुख सदस्य
बैठक में सुशांत गैरोला (अध्यक्ष), प्रशांत नौटियाल (उपाध्यक्ष), शौर्य गैरोला (सचिव), वैभव खंडूरी (उप सचिव), दीपक बिजल्वाण (कोषाध्यक्ष) के साथ बुद्धि सिंह रावत, हरीश बिजल्वाण, अनिरुद्ध सजवाण, महेश बिजल्वाण, सुधीर बिजल्वाण, आशीष नौटियाल, राहुल सजवाण और अमित बडोनी उपस्थित रहे।
सभी सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं होगा बल्कि उत्तराखंड की सामुदायिक एकता, लोक संस्कृति और आस्था के पुनर्जागरण का प्रतीक बनेगा।