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हे भगवान ! कैसे हो काम ?

सुशील शुक्ला, कानपुर

कहते हैं भगवान भाव के भूखे होते हैं, चाहे गीता हो या फिर कोई पुराण सभी में भगवान के लिए कुछ इसी तरह बताया गया है, लेकिन आज जिस तरह से हम भगवान को पूज रहे हैं क्या उससे भगवान खुश होते होंगे ?

मैने एक गणेश पूजा में पुजारी द्वारा जिस तरह की पूजा विधि को अपनाते देखा उससे दंग रह गया, वैसे जो मैने देखा उसे देखना कोई भगवान के दर्शन प्राप्त करनने जैसा अनुभव नहीं था जिसे कि दिव्य आंखों से ही देखा जा सकता है,ऐसा अमूमन हर जगह पूजा होते हुए देखा जा सकता है, दरअसल पुजारी जी जिस समय पूजा करा रहे थे, उस दौरान मंत्रों के जाप के साथ वो भक्त को तरह तरह के निर्देश दे रहे थे।

पंडित जी ने मंत्रों को पढ़ते हुए अचानक भक्त से कहा कि भगवान कू मूर्ती को फूलों की माला पहनाओं, भक्त ने भी देर नहीं कि वो तुरंत अपनी जगह से उठा और उसने वहां स्थित सभी मूर्तियों को फूलों की माला पहना दी, एक भोलेनाथ की मूर्ती ऐसी थी जो थोड़ा भक्त से दूर थी तो उसने माला को थोड़ा उछालकर उनके गले में पहनाई, लेकिन ये इत्तेफाक था कि माला थोड़ा ज्यादा नीचे आ गई। पंडित जी ने जब देखा कि माला ठीक से भगवान के गले में नहीं पड़ी तो उन्होने भी थोड़ा जोर लगाया और माला को उछालकर भोलेनाथ के गले में पहना दी, अधिकांश मैने ये दृश्य शादी वगैरह में ज्यादा देखे थे जिसमें जब दूल्हे को वरमाला पहनाते हुए जब उसके दोस्त उसे ऊपर की ओर उठा लेते हैं, तो दुल्हन माला उछालकर दूल्हे के गले में डाल देती है। लेकिन यहां पूजा विधि चल रही थी और भगवान की पूजा के दौरान उनको माला पहनाकर सम्मान दिया जा रहा था, क्या ऐसा सम्मान भगवान को मोह लेता होगा या फिर वो और नाराज होते होंगे ?

मैं खुद पूजा विधि नहीं जानता लेकिन जब ये दृश्य देखा तो लगा कि आज भगवान किसी को दर्शन क्यों नहीं देते ? पूरी पूजा विधि के दौरान कई ऐसी घटनाएं घटी जो मैं पहले भी कई जगह देख चुका था इसलिए सोचा कि सबको अपने मन की व्यथा सुनाऊं, आज पंडित सिर्फ पूजा पाठ करके अपना घर चला रहे हैं, पूजा उनके लिए रोजगार का साधन है यही कारण है कि जैसा जजमान मिल जाता है वैसी पूजा होती है, जजमान अगर मोटा आसामी है तो पूजा थोड़ी देर तक होती है विधि विधान के साथ होती है, लेकिन अगर वो ज्यादा धन नहीं दे सकता तो  10 मिनट में विधि संपन्न हो जाती है। उनके मन में ही भगवान के लिए कोई खास रुचि नहीं दिखती शायद यही कारण है कि आज हमें तरह तरह की आपदाओं का शिकार होना पड़ रहा है।

पंडित जी ने पूजा कराई और दक्षिना लेकर वो अपने घर चले गये, भक्त भी खुश हो गये कि गणपति बप्पा उनके सारे विघ्न हर लेंगे, लेकिन क्या इस तरह से ? मेरा ये कहना नहीं है कि जो विधि मैने देखी उससे भगवान खुश नहीं हुए होंगे क्योंकि वहां कुछ भक्त मुझे ऐसे भी दिखे कि जिन्हे पूजा विधि से कोई मतलब नहीं था वो सिर्फ बप्पा के ध्यान में मग्न थे।

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