देहरादून में मोहन भागवत का पूर्व सैनिकों संग संवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा से UCC तक रखी स्पष्ट राय – Satya Voice

देहरादून में मोहन भागवत का पूर्व सैनिकों संग संवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा से UCC तक रखी स्पष्ट राय

देहरादून

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ( RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के उत्तराखंड प्रवास के दूसरे दिन देहरादून के निम्बूवाला स्थित हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, गढ़ी कैंट में पूर्व सैनिकों और पूर्व सेना अधिकारियों के साथ प्रमुख जन गोष्ठी एवं समन्वित संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पूर्व सैन्य अधिकारियों और सैनिकों ने भाग लिया। पूर्व मेजर जनरल गुलाब सिंह रावत, कर्नल अजय कोठियाल और कर्नल मयंक चौबे ने पारंपरिक सम्मान के साथ भागवत का स्वागत किया। कार्यक्रम में सेवा निवृत्त जनरल, वाइस एडमिरल, डीजी कॉस्ट गार्ड, ब्रिगेडियर, 50 से अधिक कर्नल रैंक के अधिकारी तथा सैकड़ों पूर्व सैनिक सैन्य परिधान में उपस्थित रहे। मंच संचालन राजेश सेठी ने किया।

समाज की शक्ति ही राष्ट्र की सुरक्षा

मुख्य उद्बोधन में मोहन भागवत ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में समाज की केंद्रीय भूमिका है। उन्होंने कहा, “समाज मजबूत होगा तो राष्ट्र की रक्षा भी सशक्त होगी।” 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से लेकर क्रांतिकारी आंदोलनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता की चेतना कभी समाप्त नहीं हुई।

संघ संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार को स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि संघ का मूल उद्देश्य व्यक्ति निर्माण है, न कि चुनावी राजनीति। उन्होंने कहा कि संघ ने दो बार प्रतिबंध झेलने के बावजूद समाज की शक्ति से स्वयं को आगे बढ़ाया।

अग्निवीर योजना पर क्या बोले?

राष्ट्रीय सुरक्षा और अग्निवीर योजना पर पूछे गए सवाल के जवाब में भागवत ने कहा कि उत्कृष्ट नेतृत्व और सैन्य तैयारी आवश्यक है। उन्होंने अग्निवीर योजना को एक प्रयोग बताते हुए कहा कि अनुभव के आधार पर इसमें सुधार की गुंजाइश पर विचार होना चाहिए।

कश्मीर, पड़ोसी देश और सुरक्षा नीति

नेपाल, बांग्लादेश और कश्मीर के संदर्भ में उन्होंने कहा कि ये ऐतिहासिक रूप से एक ही सांस्कृतिक भू-भाग के अंग रहे हैं। कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताते हुए उन्होंने विरोधी मुहिमों के प्रति दृढ़ नीति अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

हिंदू पहचान और सामाजिक समरसता

भागवत ने कहा कि भारतीय दृष्टि “वसुधैव कुटुंबकम्” पर आधारित है। उन्होंने मंदिर, जल स्रोत और श्मशान जैसे सार्वजनिक संसाधनों को सभी हिंदुओं के लिए समान रूप से खुले होने की बात कही।

सोशल मीडिया पर बढ़ती कटुता के संदर्भ में उन्होंने सार्थक संवाद और शास्त्रार्थ की परंपरा को पुनर्जीवित करने पर जोर दिया।

UCC, आरक्षण और जनसंख्या असंतुलन

समान नागरिक संहिता (UCC) को राष्ट्रीय एकात्मता का साधन बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे सामाजिक विवाद कम होंगे। आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने व्यापक सामाजिक सहमति की आवश्यकता बताई। जनसंख्या असंतुलन के विषय में उन्होंने मतांतरण, घुसपैठ और जन्मदर को कारण बताते हुए समग्र नीति की आवश्यकता पर बल दिया।

पलायन और स्थानीय विकास पर फोकस

गढ़वाल समेत पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन रोकने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने की जरूरत बताई।

कार्यक्रम के अंत में भागवत ने पूर्व सैनिकों से संघ के 1 लाख 30 हजार से अधिक सेवा प्रकल्पों से जुड़ने का आह्वान किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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