Sundar Pichai का बड़ा संदेश: “AI के बेहतरीन नतीजे तय नहीं, मिलकर काम करना होगा” – Satya Voice

Sundar Pichai का बड़ा संदेश: “AI के बेहतरीन नतीजे तय नहीं, मिलकर काम करना होगा”

नई दिल्ली | डिजिटल डेस्क

Google के CEO सुंदर पिचाई ने India AI Action Summit 2026 में वैश्विक टेक कंपनियों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में मिलकर काम करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि AI मानवता के लिए ऐतिहासिक अवसर लेकर आया है, लेकिन इसके सर्वश्रेष्ठ परिणाम अपने आप सुनिश्चित नहीं हैं—उन्हें जिम्मेदारी और सहयोग से हासिल करना होगा।

पिचाई ने कहा, “AI अरबों लोगों के जीवन में सुधार ला सकता है और विज्ञान की सबसे कठिन चुनौतियों को हल कर सकता है। लेकिन इसके बेहतरीन नतीजे गारंटीड नहीं हैं। हमें AI को साहस के साथ आगे बढ़ाना होगा, जिम्मेदारी से अपनाना होगा और इस दौर में साथ मिलकर काम करना होगा।”

“AI ने मुझे बड़े सपने देखने पर मजबूर किया”

पिचाई ने AI को “हमारी जिंदगी का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म शिफ्ट” बताते हुए कहा कि कोई भी तकनीक उन्हें AI जितना उत्साहित नहीं करती।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि 50 वर्षों से प्रोटीन स्ट्रक्चर की भविष्यवाणी विज्ञान की बड़ी चुनौती थी। लेकिन Demis Hassabis और उनकी टीम ने Google DeepMind में AI के जरिए इसे हल करने का साहसिक प्रयास किया।

इस प्रयास से विकसित हुआ AlphaFold, जिसने दशकों के शोध को संक्षिप्त कर एक ओपन डेटाबेस में बदल दिया। आज 190 से अधिक देशों के 30 लाख से ज्यादा शोधकर्ता इसका उपयोग मलेरिया वैक्सीन, एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस और अन्य बीमारियों के समाधान के लिए कर रहे हैं।

पिचाई ने बताया कि Isomorphic Labs अब AI के जरिए दवा खोज (Drug Discovery) की प्रक्रिया को तेज करने पर काम कर रही है।

भारत में AI की भूमिका: किसानों से लेकर कनेक्टिविटी तक

भारत का जिक्र करते हुए पिचाई ने कहा कि गूगल ने यहां 15 बिलियन डॉलर के इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश की प्रतिबद्धता दोहराई है।

उन्होंने बताया कि पिछले साल पहली बार भारतीय सरकार ने लाखों किसानों को AI आधारित मॉनसून पूर्वानुमान भेजे, जो गूगल के Neural GCM मॉडल की मदद से संभव हुआ। इससे किसानों को अपनी फसल और आजीविका बचाने में सहायता मिली।

गूगल ने अमेरिका-भारत कनेक्ट पहल के तहत अमेरिका और भारत के बीच चार नए सबसी केबल सिस्टम सहित वैश्विक फाइबर नेटवर्क का विस्तार भी शुरू किया है।

“डिजिटल डिवाइड, AI डिवाइड न बने”

पिचाई ने चेताया कि AI का लाभ सभी तक पहुंचे, इसके लिए कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर, इंटरनेट कनेक्टिविटी और स्किलिंग में निवेश जरूरी है।

उन्होंने कहा, “हम डिजिटल डिवाइड को AI डिवाइड बनने नहीं दे सकते।”

गूगल अब तक 10 करोड़ लोगों को डिजिटल स्किल्स में प्रशिक्षित कर चुका है। साथ ही, नया Google AI Professional Certificate लॉन्च किया गया है, जिससे लोग अपने कार्यक्षेत्र में AI का प्रभावी उपयोग सीख सकें।

विश्वास कायम रखने के लिए गूगल ने SynthID जैसे टूल विकसित किए हैं, जो डिजिटल कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि में मदद करते हैं।

सरकारों और कंपनियों की साझा जिम्मेदारी

पिचाई ने कहा कि AI के पूरे लाभ तभी मिलेंगे जब सरकारें और निजी कंपनियां साथ मिलकर काम करें।

सरकारों को नियामक (Regulator) और इनोवेटर दोनों की भूमिका निभानी होगी, जबकि कंपनियों को ऐसे उत्पाद विकसित करने होंगे जो ज्ञान, रचनात्मकता और उत्पादकता को बढ़ावा दें।

उन्होंने उदाहरण दिए—

  • युगांडा सरकार AI और सैटेलाइट इमेजरी से ग्रामीण विद्युतीकरण क्षेत्रों की पहचान कर रही है।
  • अमेरिका के मेम्फिस शहर में AI के जरिए सड़कों के गड्ढों की पहचान कर मरम्मत प्रक्रिया तेज की जा रही है।

“अब साथ मिलकर काम करने का समय”

अपने संबोधन के अंत में पिचाई ने कहा,

“हमारे पास जीवन को पीढ़ियों तक बदलने का अवसर है। क्षमता भी है और इच्छाशक्ति भी। अब हमें साथ मिलकर काम करना होगा।”

AI को लेकर यह संदेश साफ है—तकनीक जितनी शक्तिशाली है, उतनी ही जिम्मेदारी भी मांगती है। और इस दौड़ में प्रतिस्पर्धा के साथ सहयोग भी उतना ही जरूरी है।

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