उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चलाया जा रहा “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम सुशासन, त्वरित सेवा और जनसमस्याओं के समाधान का मजबूत मॉडल बनकर सामने आया है।
इस पहल के तहत सरकार सीधे जनता के द्वार तक पहुँचकर उनकी समस्याओं का समाधान कर रही है।
कार्यक्रम की 6 फरवरी 2026 तक की प्रगति के अनुसार, राज्य के सभी 13 जनपदों में अब तक 581 शिविरों का आयोजन किया जा चुका है।
इन शिविरों में 4 लाख 59 हजार 719 नागरिकों ने भाग लेकर विभिन्न सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ उठाया। शुक्रवार को आयोजित 7 नए शिविरों में 3,929 नागरिकों ने सहभागिता की।
शिविरों के माध्यम से जनता की समस्याओं को सुनकर उन पर त्वरित कार्रवाई की गई। अब तक 44,602 शिकायतें और प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 30,509 शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है। यह आंकड़ा शासन की संवेदनशीलता और प्रशासनिक दक्षता को दर्शाता है।
इसके साथ ही, विभिन्न प्रमाण पत्रों के निर्माण के लिए 65,092 आवेदन प्राप्त हुए, जिससे आम लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिली। वहीं, 2,55,563 से अधिक नागरिकों को अलग-अलग सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ दिया गया।
जनपदवार आंकड़ों की बात करें तो हरिद्वार, उधम सिंह नगर, देहरादून, अल्मोड़ा, पौड़ी और पिथौरागढ़ सहित पर्वतीय और मैदानी जिलों में इस कार्यक्रम को व्यापक समर्थन मिला। खास तौर पर हरिद्वार जनपद में 1,00,911 नागरिकों की भागीदारी दर्ज की गई, जो इस पहल की लोकप्रियता को दर्शाती है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आम नागरिक के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। सरकार का लक्ष्य है कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचे और उसकी समस्याओं का समाधान पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से हो।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शिविरों में प्राप्त शिकायतों और आवेदनों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए, ताकि जनता का भरोसा और मजबूत हो।
यह कार्यक्रम उत्तराखंड में सुशासन, पारदर्शिता और जनसेवा की दिशा में धामी सरकार की एक प्रभावशाली उपलब्धि के रूप में उभर रहा है।