पौड़ी से पिथौरागढ़ तक ‘कच्ची सड़कों’ की चुनौती, 2031 तक सभी सड़कें होंगी पक्की
देहरादून: उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में कच्ची सड़कों की समस्या लंबे समय से लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। खासतौर पर बारिश के मौसम में ये सड़कें आवाजाही को मुश्किल बना देती हैं। अब राज्य सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए बड़ा प्लान तैयार किया है।
सरकार ने राज्य की 5,734 किलोमीटर कच्ची सड़कों को चरणबद्ध तरीके से पक्का करने का लक्ष्य तय किया है। इस योजना से 8.24 लाख से ज्यादा लोगों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।
कितनी है समस्या?
राज्य के कुल 42,157 किलोमीटर सड़क नेटवर्क में से करीब 6,500 किलोमीटर सड़कें अभी भी कच्ची हैं। ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में यह समस्या सबसे ज्यादा गंभीर है, जहां सड़कें ही जीवनरेखा मानी जाती हैं।
इन जिलों में सबसे ज्यादा कच्ची सड़कें
* पौड़ी – 1,706 किमी
* टिहरी – 856 किमी
* अल्मोड़ा – 656 किमी
* पिथौरागढ़ – 527 किमी
* उत्तरकाशी – 466 किमी
यहां सबसे कम कच्ची सड़कें
* उधम सिंह नगर – 0 किमी
* हरिद्वार – 0.60 किमी
* रुद्रप्रयाग – 148 किमी
* बागेश्वर – 222 किमी
* चंपावत – 230 किमी
सरकार का प्लान क्या है?
* कच्ची सड़कों को चार चरणों में पक्का किया जाएगा
* पहले चरण में 6,200 करोड़ रुपये खर्च होंगे
* 2031 तक सभी कच्ची सड़कों को पक्का करने का लक्ष्य
क्यों है यह योजना अहम?
पहाड़ी इलाकों में सड़कें सिर्फ आवागमन का साधन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार तक पहुंच का आधार होती हैं। कच्ची सड़कें होने से आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित होती हैं।
सरकार का फोकस
राज्य सरकार का कहना है कि गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी देना प्राथमिकता है और इस दिशा में तेजी से काम किया जाएगा, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों को भी मुख्यधारा से जोड़ा जा सके
निष्कर्ष
अगर यह योजना तय समय पर पूरी होती है, तो उत्तराखंड के लाखों लोगों की जिंदगी आसान हो सकती है और पहाड़ी क्षेत्रों में विकास को नई गति मिलेगी।