देहरादून। उत्तराखंड में वर्षों से लंबित भूमि और राजस्व विवादों के त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ‘राजस्व लोक अदालत’ का शुभारम्भ किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता आमजन को सरल, सुलभ और समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना है। इसी उद्देश्य से ‘न्याय आपके द्वार’ अभियान को नई मजबूती देते हुए प्रदेशभर में एक साथ राजस्व लोक अदालतों का आयोजन किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र को आगे बढ़ाने वाला है, ताकि योजनाओं और सेवाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक तेजी से पहुंच सके।
उत्तराखंड के 13 जिलों में 210 स्थानों पर लगेगी राजस्व लोक अदालत
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के सभी 13 जिलों में 210 स्थानों पर एक साथ राजस्व लोक अदालत आयोजित की जा रही है। इसके माध्यम से करीब 6,933 लंबित मामलों का निस्तारण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राजस्व विवाद केवल कागजी प्रक्रिया नहीं हैं, बल्कि इनसे किसानों की जमीन, परिवारों की आजीविका और लोगों का सम्मान जुड़ा होता है।
राज्य में वर्तमान समय में 400 से अधिक राजस्व न्यायालय कार्यरत हैं, जिनमें लगभग 50 हजार से ज्यादा मामले लंबित हैं। इनमें राज्य स्तर पर राजस्व परिषद, मंडल स्तर पर मंडलायुक्त न्यायालय, जिला स्तर पर कलेक्टर न्यायालय तथा तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारी, तहसीलदार और नायब तहसीलदार न्यायालय शामिल हैं।
भूमि विवादों के साथ कई अन्य मामलों का भी होगा निस्तारण
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व लोक अदालत में केवल भूमि विवाद ही नहीं, बल्कि आबकारी, खाद्य, स्टाम्प, सरफेसी एक्ट, गुंडा एक्ट, सीआरपीसी, विद्युत अधिनियम, वरिष्ठ नागरिक अधिनियम और रेंट कंट्रोल एक्ट से जुड़े मामलों का भी समयबद्ध और पारदर्शी समाधान किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘सरलीकरण, समाधान, निस्तारीकरण और संतुष्टि’ के मूल मंत्र पर काम कर रही है, ताकि लोगों को वर्षों तक न्याय के लिए भटकना न पड़े।
घर बैठे दर्ज होंगे भूमि विवाद, लॉन्च हुआ Revenue Court Case Management System
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने ‘Revenue Court Case Management System’ पोर्टल विकसित किया है। इस पोर्टल के जरिए अब लोग घर बैठे अपने भूमि और राजस्व विवाद से जुड़े मामले दर्ज कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार Minimum Government, Maximum Governance के विजन पर काम कर रही है और डिजिटल माध्यमों से आमजन तक सेवाएं पहुंचाने का प्रयास कर रही है। ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान के तहत यह पोर्टल लोगों को न्याय व्यवस्था से जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाएगा।
अधिकारियों को एक महीने में विवाद निपटाने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अविवादित विरासत के मामलों में भू-स्वामी की मृत्यु के बाद तय समयसीमा के भीतर नामांतरण किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि मृतक की तेहरवीं या पीपलपानी तक वारिसों के नाम दर्ज कर नई खतौनी परिवार को सौंप दी जाए।
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने विवादित भूमि की पैमाइश और कब्जे से जुड़े मामलों का निस्तारण एक महीने के भीतर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लोक अदालत की सबसे बड़ी विशेषता पारदर्शिता और निष्पक्षता है, जहां सभी पक्षों को सुनकर संवेदनशीलता के साथ फैसला किया जाता है।
मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को दिए निर्देश
मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने बैठक में कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार राजस्व मामलों का तेजी से निस्तारण किया जाएगा। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि अगले एक महीने में लंबित राजस्व वादों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए और भूमि विवादों को विशेष प्राथमिकता दी जाए।
बैठक में राजस्व सचिव रंजना राजगुरु भी मौजूद रहीं।