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शरीर के आदर्श वजन के लिए जीवनशैली में लाएं बदलाव

नई दिल्ली, 7 अप्रैल (आईएएनएस लाइफ)। जहां हर कोई आदर्श वजन और स्वस्थ शरीर चाहता है, वहीं यह उन कार्यो में से एक है, जिसके लिए सबसे अधिक अभ्यास की जरूरत होती है। आदर्श शरीर के वजन के लिए कैलोरी-नियंत्रित आहार लेना और पर्याप्त शारीरिक गतिविधि बनाए रखना चाहिए।

इसके अलावा, एक मजबूत प्रतिरक्षा, एक स्वस्थ जीवनशैली और एक आदर्श वजन सुनिश्चित करने के लिए व्यक्ति को दिन-प्रतिदिन के खाने और स्वास्थ्य की आदतों में स्थायी परिवर्तन करना चाहिए।

जीवनशैली में ये तीन उल्लेखनीय बदलाव हमारे शरीर के वजन और स्वास्थ्य पर स्थायी प्रभाव छोड़ सकते हैं :

पौष्टिक भोजन : स्वस्थ भोजन स्वस्थ जीवनशैली की ओर पहला कदम है और सबसे महत्वपूर्ण भी है। वजन प्रबंधन में निरंतरता बनाए रखने के लिए खाने के पैटर्न का पालन करने की जरूरत होती है, जिससे भूख की संतुष्टि के साथ वजन के रखरखाव होता है।

एक तरीका यह सुनिश्चित करना है कि आप अपने कैलोरी सेवन को कम कर सकते हैं और अपने भोजन की खपत पर नियंत्रण रख सकते हैं। फूड जर्नल या फूड एक्टिविटी ऐप का उपयोग करके कोई भी उपभोग की जाने वाली प्रत्येक वस्तु की निगरानी कर सकता है। इसके अलावा, किसी को अधिक पोषक तत्व आधारित खाद्य पदार्थ – फल, सब्जियां और साबुत अनाज खाने को सुनिश्चित करना चाहिए। इसके अलावा, पौष्टिक खाद्य पदार्थो में विविधता के लिए प्रयास करके व्यक्ति अपने पसंदीदा खाद्य पदार्थो को छोड़े बिना अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।

सक्रियता : नियमित व्यायाम का रहस्य यह है कि यह न केवल कैलोरी प्रतिबंध की अनुमति देता है, बल्कि वजन घटाने और वजन प्रबंधन को बढ़त देने में भी मदद कर सकता है। अतिरिक्त कैलोरी को जलाने में मदद करके, नियमित व्यायाम के माध्यम से सक्रिय रहना जीवनशैली में सबसे अच्छा परिवर्तन है, जिसे कोई भी अपना सकता है।

सप्ताह के अधिकांश दिनों में कम से कम 30 मिनट के लिए स्थिर एरोबिक व्यायाम – जैसे तेज चलना – के माध्यम से जीवनशैली में एक छोटा सा बदलाव किया जा सकता है।

सकारात्मकता : केवल स्वस्थ भोजन और व्यायाम ही पर्याप्त नहीं है, सफल वजन प्रबंधन तय करने के लिए एक सकारात्मक दृष्टिकोण को सही आदतों के साथ जोड़कर कोई भी व्यक्ति जीवनशैली में आवश्यक परिवर्तन ला सकता है।

सबसे पहले, अपने शरीर की जरूरतों को महसूस करना चाहिए और फिर अपने लिए एक लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। कठोर होने के बजाय, उन्हें सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए धीरे-धीरे आदतों और दृष्टिकोणों को बदलना चाहिए।

(न्यूट्रिशनिस्ट प्रीतिका बेदी हेल्थसेक की फाउंडर हैं)

–आईएएनएस

एसजीके

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