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योग से मनुष्य की शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक जरूरतें पूरी हो सकती हैं – निरंजनानंद सरस्वती

मुंगेर, 28 मई (आईएएनएस)। पद्मभूषण से सम्मानित निरंजनानंद सरस्वती का मानना है कि दो वर्षों के करोना के भयावह दौर को झेलने के बाद भी सेहत के क्षेत्र में कई तरह की चुनौतियां उभरी हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इसका दूरगामी प्रभाव देखने को मिलेगा।

उन्होंने लोगो से इसके प्रति सजग होने की अपील करते हुए कहा कि योग एक ऐसा माध्यम है जिससे न केवल मनुष्य की शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक जरूरतें पूरी हो सकती हैं, बल्कि मानव के व्यक्तित्व का पूर्ण रूपान्तरण किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि कोविड के दौरान व्यक्ति का सबसे ज्यादा श्वसन तंत्र प्रभावित हुआ। इस स्थिति में योग ने प्रभावी भूमिका अदा की।

विश्व योग पीठ के निरंजनानंद सरस्वती ने कहा कि कोरोना काल बिहार योग विद्यालय ने योगासनो, प्रणायाम का एक कैपसुल तैयार किया,जिससे काफी लोग लाभान्वित हुए। करोना के बाद भी अनेक तरह की परेशानियां बढ़ी हैं। गुर्दे, फेफड़े और यकृत समेत कई प्रमुख अंगों एवं प्रणालियों के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य जटिलताएं शामिल हैं। उस दौर में स्वास्थ्य सेवा की वहाली को सामाजिक जवाबदेही मानते हुए नगर वासियों के लिए तीन एम्बुलेंस उपलब्ध कराए गए।

स्वामी निरंजनानंद ने कहा कि गुरू पूर्णिमा से बिहार योग विद्यालय और आश्रम खुल जाएंगे।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री योग से सम्मानित बिहार योग विद्यालय मार्च 2020 से बंद है। इसके साथ ही सावन के चातुर्मास के दौरान पोस्ट कोविड सिन्ड्रोम से मुकावला करने और शारीरिक जरूरतों, सेहत के लिए योग का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। बिहार योग विद्यालय मुंगेर के लोगों के लिए एमआर आई मशीन उपलब्ध कराएगा।

उन्होंने कहा कि योग थाइमस ग्रंथि को उत्तेजित करके, बेहतर ऑक्सीजन प्रवाह के लिए छाती को खोलने और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में मददगार हैं। इसे चिकित्सा विज्ञान भी मानता है। विज्ञान की कसौटी पर यह सिद्ध भी है। प्राणायाम मानसिक तनाव से उवरने में कारगर सिद्ध हुआ है।

अंतराष्ट्रीय योग दिवस के संदर्भ में परमहंस निरंजनानंद सरस्वती ने कहा कि मेरी यह सोच है कि मन की अवस्था के प्रति एक साल सजग होने का संकल्प लें। एक साल व्यक्ति शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दे, तनाव को कम करें, हंसमुख रहें। आवश्यकताओं में जो प्राथमिकता है,पूरा करे। स्वास्थ्य,इच्छा और प्राथमिकता पर ध्यान दें। यही विश्व योग दिवस का संदेश है।

उन्होंने कहा कि जीवनशाली के रूप में जब योग को अपनाते हैं तो शारीरिक स्वास्थ्य एवं स्फूर्ति में वृद्धि, मानसिक स्पष्टता एवं रचनात्मकता में विकास तथा जीवन में शांति का अनुभव होता है।

उन्होंने बताया कि अमेरिका में तो मिनिमिल्थ ग्रुप है जो मन और व्यवहार में परिवर्तन लाने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जतायी कि सोशल मीडिया अधिक उपयोग से मनोवैज्ञानिक असर भी पड़ा है।

–आईएएनएस

एमएनपी/एएनएम

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