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बिहार में कोसी-मेची लिंक परियोजना से सीमांचल लाभान्वित

पटना, 27 मई (आईएएनएस)। बिहार मंत्रिमंडल में कोसी-मेची राज्य लिंक परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद यह आस जगी है कि इस परियोजना का कार्य अब सरजमी पर उतरेगा। माना जा रहा है कि इस परियोजना से बाढ़ से राहत मिलेगी वहीं सिंचाई की सुविधा भी बढ़ेगी।

कोसी-मेची अंतरराज्यीय लिंकिंग परियोजना है, जिसका उद्देश्य उत्तर बिहार में मानसून अवधि के दौरान सिंचाई लाभ प्रदान करना है। लोगों को वार्षिक बाढ़ और जलभराव की स्थिति का सामना करना पड़ता है, इसका उद्देश्य इन समस्याओं से मुक्ति दिलाना है।

जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा कहते हैं कि कोसी-मेची योजना से राज्य में दो लाख 14 हजार 882 हेक्टेयर में सिंचाई की व्यवस्था हो सकेगी। योजना में 76.20 किलोमीटर लंबी नहर बनाकर कोसी के अतिरिक्त पानी को महानंदा बेसिन में ले जाया जाएगा।

मौजूदा आकलन के अनुसार इस पर चार हजार नौ सौ करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे चार जिलों को लाभ होगा। सबसे अधिक लाभ अररिया और पूर्णिया जिले को होगा। इन दोनों जिलों की क्रमश: 59 हजार 642 और 59 हजार 970 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई होगी।

इसके अलावा किशनगंज जिले में 39 हजार 548 और कटिहार जिले में 35 हजार 635 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई हो सकेगी। इससे कोसी और सीमांचल इलाके को बाढ़ से होने वाली परेशानी भी कम होगी।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में इसका कार्य शुरू करने को हरी झंडी मिल गई है। साथ ही, इसके कार्यकारी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के लिए सर्वेक्षण एवं अन्वेषण कार्य को दो करोड़ 78 लाख की प्रशासनिक एवं व्यय की स्वीकृति भी मिल गई है।

बताया जाता है कि भारत सरकार द्वारा इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना में शामिल करते हुए, इसके लिए 60 (केंद्रांश) और 40 (राज्यांश) के रूप में बजटीय प्रावधान की मंजूरी दी गई है।

वैसे, कुछ लोग इस परियोजना को लेकर चिंतित भी हैं। कई स्थानीय लोगों को डर है कि इससे उनके खेतों में बाढ़ और जलभराव की संभावना बढ़ सकती है और उनकी भूमि नष्ट हो सकती है।

–आईएएनएस

एमएनपी/आरएचए

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