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तीनों कृषि कानूनों की वापसी पर बोले राकेश टिकैत, किसानों की मांग अभी बाकी

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tikait

-कैप्टन अमरिंदर सिंह ने की प्रधानमंत्री की प्रशंसा, फैसले को बताया महान और ऐतिहासिक

-विपक्ष ने बताया उप चुनावों में भाजपा को मिली करारी हार का नतीजा

देहरादून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीनों कृषि कानून वापसी की घोषणा के बाद संयुक्त किसान मोर्चा से लेकर तमाम विपक्षी दलों की ओर से सरकार के इस फैसले पर प्रतिक्रियाओं का सिलसिला जारी हैं। जहां संयुक्त किसान मोर्चा के बड़े नेता सरकार के इस निर्णय को अभी अधूरी जीत बता रहे हैं, तो वहीं विपक्षी दल इसे सत्ता हाथ से जाने के डर से लिया गया निर्णय बताने में लगे है।

संयुक्त किसान मोर्चा का सबसे बड़ा चेहरा राकेश टिकैत ने सरकार की इस घोषणा को किसानों के संघर्ष का नतीजा बताते हुए कहा कि, यह किसानों की अभी अधूरी जीत है, टिकैत ने कहा कि किसानों की सभी मांगे अभी पूरी नहीं हुई है। इसलिए अभी किसान आंदोलन जारी है। टिकैत ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी व सीटू प्लस 50% लागू करने की बात कही। कहा कि जब तक इन मांगों को पूरा नहीं किया जाता किसान आंदोलन जारी रहेगा।

टिकैत ने यह भी कहा कि धानमंत्री नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब वह उस कमेटी में शामिल थे जिस कमेटी ने एमएसपी पर कानूनी गारंटी सहित सीटू प्लस फार्मूले को लागू करने की सिफारिश की थी। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री को अपने ही उस समय के फैसले को बिना देर किए लागू कर देना चाहिए व न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी की किसानों की मांग को पूरा करना चाहिए।

इसके अलावा टिकैत ने कहा कि आंदोलन के चलते जिन किसानों पर मुकद्दमे लगाए गए हैं उन्हें भी सरकार को तुरंत वापस लेना चाहिये, उन्होंने आहे कहा कि सरकार की हठधर्मिता के कारण अब तक इस आंदोलन के चलते 700 किसानों की शहादत हो चुकी है। उन किसानों के परिवार को नौकरी सहित आर्थिक मदद भी सरकार को देनी चाहिए।

वहीं सरकार के इस फैसले को लेकर विपक्ष पूरी तरह हमलावर है। विपक्ष का कहना है कि किसान आंदोलन के चलते देश में हुए उपचुनावो के नतीजों ने भाजपा के अहंकार को चकनाचूर कर दिया है।

समाजवादी पार्टी की ओर से अखिलेश यादव ने इसे सरकार के अहंकार की हार के साथ किसानों व लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया है तो कांग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी वाड्रा ने पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सरकार की नीयत पर निशाना साधते हुए कहा है कि यह किसानों पर मेहरबानी नहीं बल्कि चुनाव में उनके खुद के सर्वे में परिस्थितियां ठीक न आने के कारण इस निर्णय को लिया गया है। प्रियंका ने तंज कसते हुए, गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा की ओर इशारा कर कहा कि किसानों को गाड़ी से कुचलने वाले शड्यंत्रकारियों को बगल में रखकर किसानों से माफी मांगने वालों की नियत पर कैसे भरोसा किया जा सकता है।

वहीं कांग्रेस के दलित नेता उदित राज ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा को कुछ नुकसान होने की आशंका तो थी, परंतु पूर्वी उत्तर प्रदेश से उन्हें लग रहा था, उस नुकसान की भरपाई हो सकती है। परंतु हाल ही में हुई प्रधानमंत्री की रैली के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन की ताकत का एहसास हो चुका है। कहा कि यह सरकार की किसानों के प्रति दरियादिली नहीं बल्कि पांच राज्यों में होने वाले चुनाव में सत्ता से हाथ धोने का डर है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसे किसानों की बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि यह हिंदुस्तान में पहली बार हुआ है जिब किसी आंदोलन के बाद कानून वापस लिए जा रहे हों। उन्होंने कहा कि यदि यह फैसला पहले लिया जाता तो सात सौ किसानों की जान बचाई जा सकती थी।

वही कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी के इस फैसले को महान बताते हुए ऐतिहासिक फैसला बताया है कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने बयान में कहा की हिंदुस्तान के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि किसी आंदोलन के चलते सरकार ने इस प्रकार का निर्णय लिया हो उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा की गई इस घोषणा को उनका बड़प्पन बताया है