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कपिल सिब्बल के राज्यसभा के लिए कदम उठाने की बंगाल में कांग्रेस, तृणमूल ने निंदा की

कोलकाता, 25 मई (आईएएनएस)। कांग्रेस और पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने बुधवार को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल की आलोचना की, क्योंकि उन्होंने समाजवादी पार्टी के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पर्चा भरा है।

लोकसभा में कांग्रेस के नेता और पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि इतने सालों तक कांग्रेस में रहे और यूपीए-1 और यूपीए-2 सरकारों में महत्वपूर्ण विभागों को संभालने के बाद सिब्बल ने राज्यसभा में कुर्सी के लिए ऐसा कदम उठाया, जो निंदनीय है।

उन्होंने कहा, राज्यसभा में उनका मौजूदा कार्यकाल जल्द ही समाप्त हो जाएगा और उनके दोबारा नामांकन की कोई उम्मीद नहीं है, इसलिए उन्होंने ऐसा फैसला किया।

चौधरी की इस तरह की प्रतिक्रिया काफी स्वाभाविक थी। इस घटनाक्रम पर सिब्बल की खिंचाई तृणमूल के वरिष्ठ नेता और तीन बार के सांसद सौगत रे ने भी की। खासकर ऐसे समय में, जब उनकी पार्टी और समाजवादी पार्टी विभिन्न मुद्दों पर एक-दूसरे के करीब रही है।

रॉय ने कहा, मैं सिब्बल की इस कार्रवाई से काफी दुखी हूं। मैं उनके राजनीतिक खेमा बदलने की खबर से खुश नहीं हूं। वह देश के प्रमुख कानूनी दिमागों में से एक हैं। उन्होंने महत्वपूर्ण केंद्रीय मंत्री सहित कांग्रेस में कई प्रमुख पदों का आनंद लिया था। वास्तव में, वह जमीनी स्तर से उठे हुए नेता हैं, लेकिन इस समय उन्होंने सिर्फ अपने हित की सेवा की है।

संयोग से, हाल के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में तृणमूल ने समाजवादी पार्टी के प्रति एकजुटता जताते हुए वहां कोई अपना उम्मीदवार नहीं उतारा। तृणमूल और समाजवादी पार्टी दोनों आगामी राष्ट्रपति चुनाव के लिए सर्वसम्मति से विपक्षी उम्मीदवार को मैदान में उतारने के मुद्दे पर नियमित बातचीत कर रहे हैं। ऐसे में सिब्बल मामले पर रॉय की टिप्पणी हैरान करने वाली है।

पिछले रविवार को भाजपा के पूर्व लोकसभा सदस्य अर्जुन सिंह की तृणमूल में वापसी के बाद रॉय ने दावा किया था कि सिंह की वापसी से उनकी पार्टी को न तो लाभ होगा और न ही नुकसान होगा।

–आईएएनएस

एसजीके

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