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इंफोसिस स्प्रिंगबोर्ड के 12 हजार पाठ्यक्रमों, डिजिटल टेक्नोलॉजी का लाभ उठा सकेंगे शिक्षा संस्थान

नई दिल्ली, 25 मई (आईएएनएस)। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और आईटी सेक्टर की प्रमुख कंपनी इंफोसिस अब एक साथ मिलकर काम करेंगे। इस नई पहल का लाभ यह है कि इसके माध्यम से एआईसीटीई से संबद्धित तकनीकी शिक्षा संस्थान इंफोसिस स्प्रिंगबोर्ड प्लेटफॉर्म पर 12,300 से अधिक पाठ्यक्रमों, डिजिटल प्रौद्योगिकियों की प्रयोगशालाओं और जीवन कौशल कार्यक्रमों का लाभ उठा सकते हैं।

इंफोसिस स्प्रिंगबोर्ड की मदद से शिक्षा संस्थान उद्योग की गतिशील आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करने और पेश करने के लिए अपनी स्वयं की माइक्रोसाइट बना सकते हैं। यह लनिर्ंग डैशबोर्ड सीखने की प्रगति को ट्रैक और मॉनिटर करने में भी मदद करता है।

इंफोसिस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट थिरुमाला आरोही ने बताया कि इन्फोसिस स्प्रिंगबोर्ड छठी कक्षा से लेकर आजीवन शिक्षार्थियों के लिए डिजिटल और जीवन-कौशल प्रदान करता है। इंफोसिस सीएसआर प्रतिबद्धता के माध्यम से 1 करोड़ से अधिक लोगों को सशक्त बनाने के लिए यह कार्यक्रम निशुल्क तैयार किया गया है। 2025 तक डिजिटल कौशल पाठ्यक्रमों की एक समग्र श्रृंखला बनाई जाएगी, जिसे कौरसेरा और हार्वर्ड बिजनेस जैसे शीर्ष डिजिटल शिक्षकों के समन्वय में पोषित किया गया है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप है।

एआईसीटीई के अध्यक्ष डॉ. अनिल सहस्रबुद्धे ने इस पहल पर कहा, इंफोसिस ने छात्रों के उत्थान और रोजगार में सुधार के लिए नए युग की भूमिकाओं और जरूरतों पर ध्यान केंद्रित करने को सरल एवं कारगर बनाया है। एआईसीटीई इंफोसिस के सहयोग से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, इंटर्नशिप और उद्योग-संस्थान के बीच समन्वय को बढ़ावा देगा। इंफोसिस ईएसजी विजन 2030 का लक्ष्य बड़े पैमाने पर डिजिटल कौशल को सक्षम करना है, जिसमें एआईसीटीई बहुत अहम योगदान निभाने को तैयार है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने सभी लोगों को शिक्षित करने के साथ ही डिजिटल शिक्षा का भी एक लक्ष्य तय किया है। इसके जरिए भारत के सभी नागरिक अपनी खुद की भाषा में इंटरनेट और डिजिटल सरकारी सेवा का उपयोग कर सकेंगे।

केंद्र सरकार द्वारा इसी उद्देश्य से भाषिणी प्लेटफॉर्म भी बनाया गया है। दरअसल यह प्लेटफार्म आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण संसाधनों को पब्लिक डोमेन में स्टार्टअप्स और निजी इनोवेटर्स को उपलब्ध कराएगा। इसका फायदा यह होगा कि जैसे-जैसे पब्लिक वेबसाइटें बहुभाषी और इंटरेक्टिव होंगी, वैसे वैसे लोक कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच भी बढ़ेगी।

–आईएएनएस

जीसीबी/एएनएम

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